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तुम कहां गए ? - 1

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      उसका यूं मिलना, मिलकर यूं बिछड़ना, किसी रोमांटिक कहानी की शुरुआत नहीं हो सकती।  सितंबर माह की उमस-भरी गर्मी और तीखी धूप भरी दोपहर, और सरे-राह चलते उसका, मुझसे यूँ  मिलना।         सच, न हवा की नरमी थी, न बादल की रिमझिम, न कोई पुरवाई, न कोई ढलती सांझ का छितिज। न चंद्रमा की श्वेत धवल चंचल चांदनी भरी रात। कुछ भी तो ऐसा नहीं था,  जिसे मैं एक रोमांटिक कहानी की शुरुआत कह सकूं।  शायद इसलिए कि इस कहानी का अंत भी निचाट गर्मी भरे दिनों की दोपहर की तरह ही होना था।       प्रश्न भावुकता का नहीं यथार्थ का था।  संयोग भी एक यथार्थ था, और वियोग भी। लेकिन हां, इस मिलन और बिछोह के बीच भावुकता के कुछ पल, हृदय के स्पंदन, भावनाओं का वेग, आवेग, आंसू , दर्द, प्रतीक्षा के कुछ पल है।        समंदर से उठती लहरों का साहिल पर आकर यू बिखरना, फिर सिमट कर उसी तरफ लौट जाना, उसी में  विलीन हो जाना, सभी कुछ तो नियत के हाथ...

वादा !

 मेरे मित्र का मित्र था. कोई ज्यादा जान-पहचान नहीं थी. दुआ सलाम और कभी-कभी उसके साथ किसी दुकान में चाय नाश्ता हो जाया करता. कद लंबा, रंग गोरा और चेहरे पर हमेशा हल्की दाढ़ी हुआ करती थी। उसके बारे में मुझे कुछ ही बातें मालूम थी जैसे वह एक प्राइवेट कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियर था घर किसी दूसरे शहर में था यहां मेरे शहर में किराए का कमरा लेकर रहता था . यह भी पता चला कि वह शादीशुदा है चार-पांच साल का एक बेटा भी है।  कभी-कभी हम दो-चार दोस्त किसी एक दोस्त के घर जमा होते हैं और गपशप करते थे।  उस दिन भी हम कुछ दोस्त उसी दोस्त के यहां जमा हुए थे जिसका कि वह दोस्त था।  उसके बारे में यह सब बातें मुझे उसी दोस्त से मालूम पड़ी थीं।  राखी के दिन का वह शाम का समय था। चाय नाश्ते का दौर चल रहा था मेरी नजर उसकी सुनी कलाई पर पड़ी मैंने पूछा तुम राखी पर घर नहीं गए साल भर का त्यौहार है कोई बहन . . . .  मेरी बात पूरी होती इससे पहले ही भाभी जी पानी का गिलास रखते हुए बोली - ' लगता है भाई साहब की कोई बहन नहीं है, कहें तो मैं बाँध दू  . . .  कमरे में ठहाका गूंज गया. ...

कर्ज़ (Story)

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    आकाश लौट कर आए तो चेहरे पर परेशानी चिंता की लकीरें थी।  चेहरा देखकर ही मैं कई आशंकाओं से घिर गई। ---- ' क्या हुआ सब ठीक तो है ' ? ---- हूँ ----- मुंह लटकाए जवाब मिला था। स्वर में कुछ निराशा थी, मैं आश्चर्यचकित। ' तो फिर आप इतने परेशान क्यों हैं ? ' कुछ नहीं बस ऐसे ही।  दूसरे दिन खबर मिली कि उन्हें फिर से दौरा पड़ा है, यह दूसरा अटैक था। हॉस्पिटल में एडमिट करना पड़ा।  मैंने कहा - ' आपको जाना चाहिए ' ?      इस बार जब वे लौटकर आए तो चेहरा तनावमुक्त था।  मैंने सोचा लगता है सब ठीक है। जब मैंने पूछा तो आशा के विपरीत उन्होंने कहा - 'बचना मुश्किल है, तुम्हें बुलाया है'  सुनकर मैं चौंक पड़ी। उनके चेहरे से, उनके भाव से ऐसा तो कुछ भी नहीं लग रहा है।  जब मैं हॉस्पिटल पहुंची तो वह लगभग अंतिम सांसे ले रही थीं  .  मासूम चेहरा जो 45 वर्ष की अवस्था में भी दिए की लौ की तरह चमकता था, सूखकर कांटा हो गया था. बड़ी  दीन - हीन और लाचार लग रही थी वे।   उनकी हालत देखकर आंखें भर आई। मुझसे एकांत में बा...

My Inception 5 - The Vision

     Vision अर्थात दृष्टिकोण। संपूर्ण ब्रह्मांड में स्थित जीव अथवा निर्जीव, चर अथवा अचर वस्तुओं को देखने का हमारा नजरिया। नजरिया जो तय करता है कि हम क्या देखना चाहते हैं, और हम वही देखना चाहते हैं, जो हमें पसंद होता है या हम जो चाहते हैं, या फिर जैसी हमारी भावना होती है।       आपने कभी किसी जादूगर को जादू का खेल दिखाते हुए देखा है ? यदि हां, तो यह भी देखा होगा कि वह बार-बार अपनी बात को एक ही पॉइंट पर स्थिर रखता है बार-बार एक ही लाइन को दोहराता है।      जैसे उदाहरण लेते हैं एक बंद डिब्बा जो पूरी तरह से खाली है वह उसमे एक फूल डालता है और आप से कहता है कि अब इस डिब्बे से कबूतर निकलेगा। ध्यान दीजिएगा, उसने फूल डाला और आप से कहा है कि अब इसमें से एक कबूतर निकलेगा। वह आपसे और भी बातें करेगा लेकिन घूम फिर कर वहीं कहेगा - देखिएगा इस डिब्बे से कबूतर निकलेगा। और अब आप वहां पर बैठे यही देखना चाहेंगे कि उस डिब्बे से कबूतर निकले।       अब वह जादूगर यह नहीं कह रहा कि कबूतर निकलेगा धीरे-धीरे आप के मन मे...

My Inception -4

     कुछ लिखने से पहले, कुछ शेयर करने से पहले मैं यह बता देना आवश्यक समझता हूं कि माई-इनसेप्शन टाइटल से इस ब्लॉग में लिखे गए मेरे खुद के विचार और अनुभव हैं और जरूरी नहीं कि उन विचारों से आप सहमत हो।        मेरे द्वारा यह भी प्रयास किया जाता है कि उन अनुभवों में शामिल व्यक्ति का नाम और पता या उनकी किसी भी प्रकार की जानकारी लिखते समय उजागर ना हो. शेष अन्य टाइटल से लिखी कहानी या कविताएं लिरिक्स आर्टिकल्स यह सब जरूरी नहीं कि मेरे व्यक्तिगत जीवन या मेरे संपर्क में रहे किसी अन्य व्यक्ति के जीवन से संबंधित हो. वे पूर्णत काल्पनिक भी हो सकते हैं।           तो आइए अब मैं अपने समक्ष घटित एक घटनाक्रम का वर्णन या यूं कहिए कि प्रस्तुतीकरण आपके करने जा रहा हूँ जो वास्तविक एवं सत्य है.       बात मेरे सर्विस पीरियड के शुरुआती दिनों की है। जब मैं अपने ऑफिस में ही अटैच था. कार्य की अधिकता जिम्मेदारी एवं अपने वरिष्ठ अधिकारिओं के प्रति उत्तरदायित्व पूर्ण व्यवहार रखते हुए कार्यों को उचित एवं अनुचित क...

एक इश्क ऎसा भी

हां मुझे याद है जब पहली बार,  मैं तुमसे रूबरू हुआ था। सामने जलता हुआ कलश, सर पर मंडप, गीत गाती हुई ढोलक में थाप देती हुई, कुछ औरतें, कुछ तुम्हारी सहेलियां, उनमें से कुछ मेरी सालिया, मम्मी, बुआ, सरहज कुछ चाचियां, मेरे पीछे बैठे मेरे कुछ ही दोस्त, अजनबी देश, अजनबी लोग। हा, इन सभी के बीच , मैंने देखा था तुम्हे पहली बार। लजाती सकुचाती सहमी खुद से ही शर्माती, अपने पापा- मम्मी के सामने बैठी तुम। मेरे हाथ में देकर तुम्हारा हाथ, जब किया था माता - पिता ने कन्यादान। तब शायद पहली बार जी भर के  देखा था हमने  एक + दूसरे की आंखों में। इस एक रिश्ते से, बने कई रिशतें, गवाह बने धरती - गगन, चांद - सितारे, मंडप, कलश, अग्नि, दसों दिशाएं, देव, गंधर्व, यक्ष, और ये हवाएं। हां कुछ ऎसे शुरू हुआ था, ये इश्क हमारा + तुम्हारा। हां . . . उसी इश्क कि सारी कशिश के साथ, मुबारक हो  शादी हमारी + तुम्हारी। Shailendra S.

हमसफ़र

तुम्हे विवाह के सालगिरह पर क्या तोहफा दूं ? लाक - डाउन जो है ? वस्तुएं दुकानों में लॉक,  ऑक्सीजन सिलेंडरों में लाक, तनहाइयां हमारे दिलों में लॉक, वफाएं, बेवफाइयों में लॉक, प्रोफाइले फेसबुक में लॉक, ट्विस्ट टियूटर में लॉक, इंटरेस्ट इंस्टाग्राम में लॉक, एहसास मैसेज बॉक्स में लाक, चिट्ठियां, ई - मेल में लॉक, अपनों के आंसू पलकों में लॉक, चांद है बादलों में लॉक, मैं खुद तुमसे दूर यहां,  सरकारी फाइलों में लॉक। पर कुछ वजहें हैं, देने के लिए तुम्हें, नहीं है बारिश, किन्हीं बंदिशों में  लॉक, नहीं है हवा, किन्हीं दिशाओं में लॉक, तुमसे मिलने की आस,  अभी नहीं हुईं हैं लॉक। शुभ कामनाएं हैं तुम्हे, हमारी शादी की अप-कमिंग सालगिरह पे Shailendra S.  With love to my wife ( Companion) HMA - 20th May