Complain
ईश्वर दिन कुशवाह राम सजीवन कुशवाहा भाटिया टोला वृद्धा पेंशन लेडीज वर्जन।। ये खामोश समुंदर कहता है, आंखों का दरिया पानी था। तेरी वफा वो तेरी मोहब्बत, बिखरे ख्वाबों का हिस्सा था। हम ढूँढ रहे हैं साहिल को, इक गहरे दर्द के दरिया में। पर सच तो है ऐ मेरे दिलवर, मिलना हमारा किस्सा था। जो लहरें आकर लौट गईं, वो बीते कल की बातें थीं, बैठे रहे हम साहिल पर, और लहरों सी बेचैनी थीं। अब दिल के सूने साजों पर, यादों का एक सन्नाटा है, जिस मोड़ पर एकपल ठहरे थे, उसी मोड़ ने हमको बांटा है। तू दूर हुआ तो जाना हमने, हर मोड़ पे एक अफ़साना था। मंज़िल मान लिया था जिसको, वो महज़ मुसाफ़िरखाना था। ग़म की इस सर्द तन्हाई में, अब ख़ुद से मिलना होता है। माना था जिसको हम-राही, उसे छोड़ के एक दिन जाना था। इक आस बनी थी जीने की, तेरे जाने से वो भी टूट गई। तेरी यादों की शाखों पर, दिल की ख़ामोशी बैठ गई। बन गई मैं भी पत्थर दिल, पर अंदर ही अंदर टूट गई। मौन रही अपनी तन्हाई पर, लोगों ने समझा मैं भूल गई। एक हूंक हृदय से उठती है, हर पल इक वीरानी है। इस तन्हा सफर के रस्ते में, इक तेरी याद पुरानी है। ये सूना आंगन, ये खाली घ...