एक पत्र
प्रिय सत्य ! यदि उसके आने से पहले या उसके पढ़ने से पहले तुम यह पत्र पढ़ रहे हो तो फिर कहती हूँ, एक बार नहीं कई बार पढ़ना और खुले मन और विचारों से पढ़ना, एक सहृदय मित्र और इंसान बनकर पढ़ना, तब निश्चित ही इस पत्र की गहराई को तुम समझ पाओगे कभी अपने बॉयफ्रेंड से मैंने कहा था कि काश ! वह मेरी जिंदगी में तुम्हारे आने से पहले आया होता लेकिन ऐसा हुआ नहीं । तो अब तुमसे कहती हूँ कि अच्छा ही हुआ कि फिर तुम मेरी जिंदगी में आए और माध्यम बने उसे मेरी जिंदगी में लाने का। कहते हैं एक दोस्त का सबसे बड़ा फर्ज होता है, अपने दोस्त को खुश रखना, उसकी हर इच्छा को पूरी होते हुए देखना, तो इस नाते तुम मेरे सबसे अच्छे दोस्त रहे जिसने अपना फर्ज अनजाने में ही सही लेकिन ईमानदारी से निभाया। तो फिर आज तुमसे कहती हूँ कि अब तुम मेरे कहने पर उसे दोबारा यहां लेकर आओ और जब तक वह यहां आ न जाए तब तक मेरी इन बुक्स को जहां रखी हैं वही रखे रहेने देना। अब उसे ही निर्णय लेने देना कि इनका क्या करना है। काश ! तुम हमेशा वही सत्य बन कर मेरे पास रहे होते जिस...