अजनबी - 4 (वह पत्र)
पुनरिश्च : मैं न तो राइटर हूँ न ही सत्य, और न ही पीहू। मैं आपको वो बातें बताने जा रहा हूँ जो राइटर ने अभी तक इस कहानी में नहीं लिखी। मैं उसके साथ-साथ चलता रहा, इस कहानी को घटित होते हुए देखता रहा। जैसा कि कभी राइटर ने पीहू से कहा था, कुछ कहानियों की नियति होती है, चलते रहना। वह कभी रुकती नहीं हैं। चाहे माइलस्टोन हो या अजनबी उसके अंतर्मन में ये कहानियां हमेशा चलती रही, शायद इसलिए कि ये फिर्फ एक कहानी ही नहीं छोटे-छोटे लम्हे थे जो कुछ किरदारों ने एक साथ जिए। राइटर भी उन्हें किरदारों में से एक था। भले ही राइटर ने इसे आज लिखा हो, लेकिन उसके जीवन में इनकी शुरुआत बहुत पहले हो चुकी थी। टीनएज में माइलस्टोन और युवा अवस्था में अजनबी की। पीहू की मृत्यु की जानकारी ने उसे कुछ महीनों तक शोक में रखा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया तो उसे पीहू और सत्य दोनों के जीवन से प्रेरणा मिली। यह सच है कि पीहू ने अपने जीवन में उसे शामिल कर जीना चाहा, लेकिन कुछ कारणों से उसे अपने जीवन में शामिल न कर सकी। उसके प्रेम की इंटेंसिटी अर्थात तीव्रता राइटर को उसके साथ जि...