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 Khaa h sahab is samay आपकी यादों में, वरना क्या वजूद हमारा  Ji Nakaila ghom jayiye kisi din पहले यह बताओ, कैसी हो तुम Badiya hu 25tarik ko aa gyi hu Nakaila नकैला छोड़े हुए लगभग 1 साल होने को आए हैं, बहुत खुशी हुई तुमने मैसेज किया Jii मेरी कार के अगले पहिए का हब डिस्टर्ब है कंपनी में आर्डर किया है लेकिन अभी तक आया नहीं है, आप ही लिए मिल लीजिए हमसे ? Jii dekhiye satna jana hoga to Call karungi aapko हम तुम्हारी मम्मी से शर्मिंदा भी हैं, एक छोटा सा सीमांकन का काम न करवा सके, जिस घर से इतना प्यार दुलार मिला इज्जत सम्मान मिला उनके किसी काम न आ सके। सोचता हूं तो गिल्टी महसूस करता हूं Koii baat nhi. Maii bhi gyi thi parso Bola h 1week k andr ki naap dunga Ri se baat kar k aai hu Paise bhi bol aai hu ki 10hjar dungii naap do Bola to h Ab dekhiye kya hota h RI कौन है ? क्या अंबिका प्रसाद त्रिपाठी जी हैं ? Nhii Rajneesh varma तब एक काम और करना, नक्शा तरमीम भी करवा लेना। Naksa satna se Nikalwa layi hu और बताओ आनंद, रिद्धि सिद्धि सब कैसे हैं Ek dum Badiya h sab log पुराना बंदोबस्ती नक्श...

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प्रिय सत्य,      हम एकदूसरे के पाप-पुण्य का निर्धारण न करें तो बेहतर है, यह हमारा काम नहीं है। कुछ गलतियां हम सभी से हुई, जो गुनाह-ए-अजीम हो गईं। पीहू गुमनाम और तन्हा मौत नहीं मरना चाहती थी। शायद इसीलिए कभी उसने मुझसे कहा था की मरते समय तुम मेरे पास रहना। उसकी यह आखिरी ख्वाइश पूरी न हो सकी। उसने अपनी संभावित मृत्यु को अपने परिजनों और हम दोनों से भी छुपा के रखा, क्या यही उसकी भूल थी ?       मैं जनता था कि पीहू की संपत्ति को लेकर तुम्हारे मन में किसी भी तरह का लालच नहीं था, इस बात के लिए मैने कभी भी तुम्हें दोषी माना ही नहीं। उस दोपहर जब आम के पेड़ के नीचे चारपाई पर पीहू सो रही थी और मैंने तुमसे जो भी बातें की, उसी पल मैने समझ लिया था कि तुम्हारे मन में कोई लालच नहीं है। तुम मुझे अच्छे लगे, तुम्हारे विचारधारा ने मुझे प्रभावित किया। मैंने पीहू के प्रति तुम्हारे मन में जो प्रेम देखा, मुझे वह कहीं से दूषित नजर नहीं आया।        बाद में मुझे तुमसे जो भी शिकायत हुई सिर्फ इस बात को लेकर कि तुम उसे अकेला छोड़ कर क्यों चले गए, जबकि उसने पहली बार तो...

अजनबी - 4 (वह पत्र)

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पुनरिश्च : मैं न तो राइटर हूँ न ही सत्य, और न ही पीहू। मैं आपको वो बातें बताने जा रहा हूँ जो राइटर ने अभी तक इस कहानी में नहीं लिखी। मैं उसके साथ-साथ चलता रहा, इस कहानी को घटित होते हुए देखता रहा। जैसा कि कभी राइटर ने पीहू से कहा था, कुछ कहानियों की नियति होती है, चलते रहना। वह कभी रुकती नहीं हैं। चाहे माइलस्टोन हो या अजनबी उसके अंतर्मन में ये कहानियां हमेशा चलती रही, शायद इसलिए कि ये फिर्फ एक कहानी ही नहीं छोटे-छोटे लम्हे थे जो कुछ किरदारों ने एक साथ जिए। राइटर भी उन्हें किरदारों में से एक था।      भले ही राइटर ने इसे आज लिखा हो, लेकिन उसके जीवन में इनकी शुरुआत बहुत पहले हो चुकी थी। टीनएज में माइलस्टोन और युवा अवस्था में अजनबी की।            एक लड़की जिसने अपने प्रेम का त्याग किया, जो मृत्यु का कारण लेकर पैदा हुई, जिसकी उसे जानकारी थी, फिर भी उसने लगातार लगभग तीन सालों तक जनकल्याण हेतु कार्य किया !! यदि राइटर की बात को अच्छी तरह से समझना है तो आप अपने आप को पीहू के स्थान पर रख के देखिए। आप मन में प्रतिपल उठते वैराग्य से खुद को क...

मैं तुम्हारी पीहू

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मेरे वजूद के पिंजड़े में आज भी,  फड़फड़ाते हैं तेरी यादों के परिंदे, जज़्बात-ए-शीशाघर में जैसे, उछाल फेंका हो पत्थर किसी ने। प्रिय अजनबी, नमस्ते,        यही तो कहा था न उस दिन, जब बगिया में तुमसे पहली बार मिली थी। क्यों नहीं पसंद आया ? तो और क्या लिखूं, तुम ही बताओ ? एक अजनबी की तरह ही तो तुम मेरी बगिया में आकर बैठ गए थे। तब क्या जानती थी कि एकदिन न जाने कितनी अनुभूतियों को अपने हृदय में संजोए तुम्हे पत्र लिखूंगी। आज हृदय से स्वागत, जो तुम लौट के यहां फिर से आए। काश ! जीवित होती तो तुम्हारी राहों में फूल बिखेरती, तुम्हारे स्वागत में स्वागत गीत गाती, जल्दी लौट कर न आने के उलाहने देती, तुमसे रूठती भी और तुम मुझे मनाते। काश ! ऐसा होता।    तो चलो पत्र की शुरुआत कुछ रोमांटिक अंदाज में करते हैं... एक ऐसे गीत के साथ जिसकी एक कड़ी मैं आज भी गनगुनाती हूँ:- जिसमें जवान हो कर, बदनाम हम हुए, उस शहर उस गली, उस घर को सलाम। जिस ने हमें मिलाया, जिस ने जुदा किया, उस वक़्त, उस घड़ी, उस पहर को सलाम। ए प्यार तेरी, पहली नज़र को सलाम।    तो लो, अब हो...