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अधूरी चाहतों अधूरी मोहब्बतें का मुसाफिर था मैं, तू मिली तो समझ में आया जिंदगी का सबब, छूट गए थे जो पल जो लम्हे मेरी जिंदगी से, तुझसे मिलना मुकम्मल था मेरी जिंदगी में। प्यार मोहब्बत रिश्ते सबसे जुदा है तू मेरी जिंदगी में, फिर वही बात, तुमसे मिलना, मिलकर बिछड़ना, किसी भी रोमांटिक कहानी की शुरुआत नहीं हो सकती... तो फिर न सही। तुम ही कहो, ऐसी कहानी को जो हकीकत है, उसे कैसे बयां किया जाए ? मैं कोई फुर्सतिया इंसान नहीं हूं कि मेरा बस यही काम है। लेकिन तुम्हें याद करना तुम्हारे बारे में सोचा मुझे हर भीड़ से अलग कर देता है, पता नहीं क्यों ऐसा होता है। कौन जाने किस जन्म या मरण का रिश्ता है हमारे बीच। हम मिलते रहे बिछड़ते रहे, न जाने जिंदगी के किस मोड़ पर फिर से मिलेंगे। कोई अधूरी कहानी कभी तो मुकम्मल होगी। हम रहे ना रहे यह दुनिया यह रिश्ते रहेंगे। एकबर फिर जिंदगी जीनी चाही मैंने, ली के इस पावन त्यौहार पर मेरी तरफ से आपको तथा आपके सभी परिवार के सदस्यों को मंगल शुभकामनाएं । रंगों का यह त्यौहार आपके शारीरिक मानसिक एवं आर्थिक जीवन को खुशियों से भर दे। लाख शिकायतें मेरे दिल को...