आह ! तुम कहां गए !!
सितारों की दुनियाँ 1 आह ! तुम कहां गए ... ? यह कहानी नहीं , एक विजन है। विजन जो मैंने अपनी आंखों से देखा , जिसे हृदय से महसूस किया। यह मन का दर्शन है। इसमें आप कोई भी कहानी फिट कर सकते हैं। वास्तव में यह कुछ पत्रों का संग्रह है , जो एक किरदार ने दूसरे किरदार के लिए लिखें , जब वह उसके जीवन से दूर , बहुत दूर जा चुका था। और जिसके लिए उसने इन्ही पत्रों में ही किसी एक पत्र में लिखा है , " तुम मेरी इस कहानी के एकमात्र और बेनाम किरदार हो " हां , एक बात और ; प्रथम पत्र के शुरुआती संबोधन और अंतिम पत्र के समापन से मैंने उनका क्रम निर्धारित किया। शेष पत्रों का क्रम मैंने अपनी स्वयं की बुद्धि और ज्ञान कौशल से निर्धारित किया है। यदि आपको इनका क्रम उचित ना लगे तो क्षमा कीजियेगा। उम्र के लिहाज से बड़ी , किंतु जिन्हें मैंने अपने मन से सदैव अपनी छोटी बहन की तरह ही माना , उन्हें सादर समर्पित - ...