गॉडफादर 2
गॉडफादर 2 पापा ! लगभग 25 वर्ष की एक खूबसूरत सी लड़की होठों में गजब की मुस्कुराहट लिए सामने खड़ी थी। उसका संबोधन सुनकर वह चौक गया, " कौन ! कौन हो तुम !! " वह कमरे में दाखिल होते हुए बोली, " पापा !! आपने मुझे पहचाना नहीं ... मैं ... मैं खुशी हूं ... " " हा ..... खुशी .... तुम यहां !! इस वक्त !! . ." , उसे एकाएक विश्वास ही न हुआ था खुशी कैसे हो सकती है वह तो . . . " हां पापा ! मैं ... आपकी बेटी ... " , ओह राइटर ! पिता के लिए बेटी के दिल की दीवानगी न पहचान पाये ? खून के रिश्ते ही सब कुछ नहीं होते, राइटर। जलजले का वह दूसरा दिन था। मंजर और भी खौफनाक था। ताश के मानिंद धराशाही इमारतें और उनके मलबे में दबी अनगिनत लाशें, और जो बचे उनके करुण विलाप। दिल दहला देने वाले अविश्वसनीय दृश्य थे। आलीशान कोठी के मलबे के ढेर के नीचे दबी लाशें अभी तक बाहर न निकाली जा सकी थी। बड़ी-बड़ी मशीने, क्रेन का भारी शोर-शराबा और उनके बीच वह स्तब्ध मौन खड़ा न रह सका। न रो लेने की क्षमता और न अपने आप को खुद समेट कर किसी ...