अंतिम सफर
10 अंतिम सफर फिर हम दोनों चल पड़े। गांव के खेतों के बीच से गुजरती हुई, बगिया से उसके घर तक जाती टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडी, जिस पर कभी मैं पीहू के साथ चला और शायद आज आखिरी बार। दोपहर का समय धूप तेज थी, और लगभग डेढ़ किलोमीटर का फासला था। सूर्य की तपिश, पीछे छूटती हुई बगिया, उस बगिया के किसी कोने में बैठे या काम करते हुए मंगल और कमली। वह पंप हाउस, वो आम का पेड़ जिसकी छांव में मेरी पीहू से पहली मुलाकात हुई थी। उसी बगिया के खट्टे-मीठे अमरूद, गाजर, चुकंदर, अनार, बेर का स्वाद कोई कैसे भूल जाए ? ढेर सारी शराब और सिगरेट के धुएं में लिप्त मेरी आवारगी, ऐसी जिंदगी कैसे एक पल में कोई छोड़ जाए ? और फिर कभी न भूलने वाले यादगार लम्हों को जहां हमने एक दूसरे के साथ जिया। पूरी ईमानदारी के साथ हमने एक दूसरे से अपने दिल की बातें शेयर की, गले लग एकदूसरे के लिए रोए। ... वो टीन-शेड जहां मेरी मुलाकात उसके उन फैमिली मेंबर्स से हुई जो हमारे बीच न रहे। वो मड़ैया, इसके आसपास हम खूब हंसे, रोए, साथ बैठकर खाना खाया, एक्टिंग की। जहां मैंने चांद सितारों के बीच अपनी रातें गुजारी। ... बेखुदी में मुझे सत्य समझ कर बात करती हुई पीह...