आशिकी भी फातिया न पढ़ेगी

 

ख्वाब को अपने अधूरा मत छोड़ शैलेंद्र,
जागने पर तुझे बेचैनियां मिलेंगी।


गर टूट कर बिखर गए राह में तो क्या,
खुद को समेट अभी तो मंजिल मिलेगी।


कौन है जो जज्ब कर लेगा तेरे एहसास,
उम्मीद से ही शमा- ए - महफिल जलेगी।


दफन तो होना है सभी को ब-दस्तूर,
तोड़ मायूसी की कब्र रोशनी दिखेगी।


गर अधूरे छोड़ ख्वाब मर भी गया,
तेरी आशिकी भी फातिया न पढ़ेगी।


जिंदादिली से अभी तो चल वरना ?
मुर्दा को चलता देख दुनिया भी हंसेगी।।


Shailendra S.

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