अजनबी (पार्ट 2) प्रिय, पीहू ! तुम्हे क्या लिखूं... यह जानते हुए कि तुम अब इन सबसे परे जा चुकी हो, फिर भी वही कहता हूँ जो अब तक तुमसे कहता आया हूँ... आज भी तुमसे प्यार है और बेशुमार है। मैं जानता हूँ, तुम्हें कोई आश्चर्य नहीं हो रहा होगा, क्योंकि लव यू तो मैं तुमसे पहले भी कहा चुका हूँ और रिस्पेक्ट तो मेरी नजरों में तुम देख ही चुकी हो। मैं यह भी जानता हूं कि यह सब कहने और सुनने की बातें नहीं, महसूस करने की हैं। जो हम बहुत दिनों पहले कर चुके हैं। फिर भी लिखता हूँ, मेरे अंतर्मन में प्रवाहित निर्मल भावनाओं को सही दिशा देने वाली प्रेरणा श्रोत हो तुम। मैं अपनी सभी निश्चल भावनाओं को एकत्र कर हृदय से तुम्हारी उज्ज्वल-पावन तस्वीर की वंदना कर श्रद्धां-सुमन अर्पित करता हूँ, इस आशा के साथ कि तुम जहां भी होगी इन्हें सप्रेम स्वीकार करोगी। कभी मैने तुमसे कहा था, "मानवी संवेदनाओं से परे यदि कोई दुनिया होती है, तो वह दुनिया देवताओं की दुनियां है और ईश्वर साक्षी है पीहू ! कि हम देवता नहीं...", तो अच्छा हुआ न कि हम ...
🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚💐💐💐🙏
ReplyDeleteTHIS ONE IS ONLY FOR YOU
ReplyDeleteAakhri do line bahut acchi lagi
ReplyDelete