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सोने का पिंजड़ा (The Golden Cage)

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      सोने का पिंजड़ा  (The Golden Cage)        बाबा ने शांत मन से कहा, "यदि तुम सोचते हो कि यह सब मुझे किसी और ने बताया है तो गलत हो तुम। यह तुम्हारी हाथ की रेखाओं में लिखा है, तुम्हारे माथे में लिखा है, जिसे मैं पढ़ सकता हूँ। और इसीलिए कहता हूँ कि पीहू के जीवन में तुम्हारा जो कार्य था वह तुम पूर्ण कर चुके। अब यहां रुक जाना तुम्हारी नियति नहीं... पीहू का अस्तित्व तुम्हारे लिए नहीं।     इस बार मैंने फिर विरोध किया लेकिन मेरे विरोध में याचना थी, "बाबा ! आपने मेरे बारे में बताया वो सब सच है। लेकिन यदि नियति का सहारा लेकर मेरी एक कमी के कारण कि मैं शराब पीता हूँ, मुझे उसकी जिंदगी से दूर करना चाहते हैं... तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि इसी क्षण मैं शराब पीने की बात तो दूर उसे छूने की भावना तक का परित्याग करने के लिए तैयार हूँ, लेकिन मुझे उसकी जिंदगी से दूर मत कीजिए..."    "मैं जानता हूं कि तुम ऐसा कर सकते हो... लेकिन तुम्हे जाना होगा...", बाबा के चेहरे में एक अजीब सी कठोरता थी। उनकी यह कठोरता देखकर मेरी आ...

अजनबी - 1

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       अजनबी    Shailendra S. (कहानी नियति की )       "....मानवीय संवेदनाओं से परे यदि कोई दुनियां होती है, तो वह दुनियां देवताओं की है, और ईश्वर साक्षी है पीहू !... हम देवता नहीं..." पूजनीय मम्मी और बाबूजी को सादर समर्पित  शैलेन्द्र एस- कहानी के किरदार ----------------------        वह दौर न तो GEN-Z जनरेशन का था और न ही ALFA का। दौर था 1992 से 2003 का, जहां मैंने अपनी  ज़िन्दगी जी। GEN-Z जनरेशन के जन्म की शुरुआत हो चुकी थी और हम ZEN-X के पहले दशक में पैदा हुए युवा अवस्था में थे। उस दौर में मोहब्बत का इजहार बोलकर कम और खत या निगाहों से अधिक किया जाता था। और इकरार ? बस थोड़ा सा मुस्कुराना ही काफी होता था।ज्यादा सवाल-जवाब नहीं होते थे। अपने हृदय की बात को दूसरे हृदय तक पहुंचाने के लिए और उन्हें जोड़ कर रखने के लिए आंखों के इशारों का वाई-फाई ही पर्याप्त होता था। ब्रेकअप, डंप ओर मूव ऑन इत्यादि शब्द मोहब्बत के बाजारम में नए-नए आए थे।        लेकिन कामयाबी या नाकामयाबी से दूर यदि मोहब्बत की बात क...