सोने का पिंजड़ा (The Golden Cage) बाबा ने शांत मन से कहा, "यदि तुम सोचते हो कि यह सब मुझे किसी और ने बताया है तो गलत हो तुम। यह तुम्हारी हाथ की रेखाओं में लिखा है, तुम्हारे माथे में लिखा है, जिसे मैं पढ़ सकता हूँ। और इसीलिए कहता हूँ कि पीहू के जीवन में तुम्हारा जो कार्य था वह तुम पूर्ण कर चुके। अब यहां रुक जाना तुम्हारी नियति नहीं... पीहू का अस्तित्व तुम्हारे लिए नहीं। इस बार मैंने फिर विरोध किया लेकिन मेरे विरोध में याचना थी, "बाबा ! आपने मेरे बारे में बताया वो सब सच है। लेकिन यदि नियति का सहारा लेकर मेरी एक कमी के कारण कि मैं शराब पीता हूँ, मुझे उसकी जिंदगी से दूर करना चाहते हैं... तो मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि इसी क्षण मैं शराब पीने की बात तो दूर उसे छूने की भावना तक का परित्याग करने के लिए तैयार हूँ, लेकिन मुझे उसकी जिंदगी से दूर मत कीजिए..." "मैं जानता हूं कि तुम ऐसा कर सकते हो... लेकिन तुम्हे जाना होगा...", बाबा के चेहरे में एक अजीब सी कठोरता थी। उनकी यह कठोरता देखकर मेरी आ...
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