आह ! तुम मुझे सोने कब दोगी ?

लेटा था आसमान के नीचे,

कुछ तारे गिन, कुछ तुम्हें याद करके,

सोचा आज सोऊंगा , रात में जी भर के,

लगातार तीन दिन जागने के बाद।

ना हवा तेज चली , 

न की बादलों ने गड़गड़ाहट,

चुपके से गए तारे खो,

दबे पांव बादल आए आसमान पे।

लगता है की सोची समझी साजिश के तहत,

कुछ अलग ही अंदाज से तुमने,

फिर किया याद मुझे।।

कि अब न आएगी नींद मुझे

बड़ी मुश्किल से किया था इरादा सोने का।।

तो जागो, अब तुम भी मेरे साथ,

अब मै भी न सोने दूंगा तुम्हे,

तुम्हारी इस आह को आज मैं,

लौटाऊंगा किसी बैरग खत की तरह,

हा, अब मैं भी न सोने दूंगा तुम्हे,

जगाऊंगा  मैं भी तुम्हें अपनी आह से।

   Shailendra S. 'Satna"

Comments

  1. Lo hum bhi jage hue hain sath is raat ke 👍 👍 😂

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    1. तुम्हें जगाना मेरा मकसद नहीं,
      खयाल है दिल में कुछ हलचल होनी चाहिए।

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    2. साथ जागे हुए तुम एक रात के,
      हर रात जागना तुम अब,
      कायम रहना तुम, अपनी हर एक बात पे

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  2. Lo hum bhi jage hue hain sath is raat ke 👍 👍 😂

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  3. अरे वाह ! इसका रिप्लाई भी कुछ अलग अंदाज में ही देना पड़ेगा -
    माना साथ जागे हुए तुम भी इस एक रात के,
    अब कायम रहना तुम अपनी हर एक बात पे

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