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अजनबी - 1

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       अजनबी    Shailendra S. (कहानी नियति की )       "....मानवीय संवेदनाओं से परे यदि कोई दुनियां होती है, तो वह दुनियां देवताओं की है, और ईश्वर साक्षी है पीहू !... हम देवता नहीं..." पूजनीय मम्मी और बाबूजी को सादर समर्पित  शैलेन्द्र एस- कहानी के किरदार ----------------------        वह दौर न तो GEN-Z जनरेशन का था और न ही ALFA का। दौर था 1992 से 2003 का, जहां मैंने अपनी  ज़िन्दगी जी। GEN-Z जनरेशन के जन्म की शुरुआत हो चुकी थी और हम ZEN-X के पहले दशक में पैदा हुए युवा अवस्था में थे। उस दौर में मोहब्बत का इजहार बोलकर कम और खत या निगाहों से अधिक किया जाता था। और इकरार ? बस थोड़ा सा मुस्कुराना ही काफी होता था।ज्यादा सवाल-जवाब नहीं होते थे। अपने हृदय की बात को दूसरे हृदय तक पहुंचाने के लिए और उन्हें जोड़ कर रखने के लिए आंखों के इशारों का वाई-फाई ही पर्याप्त होता था। ब्रेकअप, डंप ओर मूव ऑन इत्यादि शब्द मोहब्बत के बाजारम में नए-नए आए थे।        लेकिन कामयाबी या नाकामयाबी से दूर यदि मोहब्बत की बात क...