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तुम कहां गए - 3

      तुमने हमेशा कहा कि तुम रिश्ते नहीं बनाते, शायद किसी रिश्ते को निभाने में नाकाम रहे हो तुम।         तभी तो कभी नहीं चाहा कि तुम मुझसे कोई रिश्ता बनाओ। बिल्कुल अजनबी की तरह मिलते रहे मुझसे। शायद बंधन भी तुम्हें स्वीकार नहीं थे।       कभी तुम, कभी आप, कभी तू, संबोधनो की तरह तुम्हारा व्यक्तित्व भी मेरे लिए उलझा ही रहा। न तुम कभी समझ पाए कि तुम मुझसे क्या चाहते हो और न ही मुझे समझा सके।  लेकिन मै .... ?       मैं उस दौर में थी, जहां हर छोटे-बड़े रिश्ते मेरे सामने मौजूद थे। उन रिश्तो को कायम रखना मेरी सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी। छोटे से छोटा रिश्ता भी मेरे लिए अहमियत रखता था।  और ?       एक ऐसा रिश्ता भी था, जिसे लोग सात जन्मों का, तो कुछ लोग जन्म-जन्मांतर का भी कहते हैं। उस एक रिश्तों को निभाने के लिए ये जरूरी था कि मैं तुम्हे जन्म - जन्मांतर के लिए उपेक्षित ही रखू।      मै नहीं समझती कि तुम इतने नादान थे कि तुम्हे कुछ दिखाई न दिया होगा। कुछ भी तो नहीं छुपाया था मैंने, और ...