एक चोर
एक चोर। दिल से लिए गए फैसले सही होते हैं लेकिन यह जरूरी नहीं कि वह फैसले आपके लिए हितकारी ही हों। एक छोटी सी कहानी कहता हूं : एक शहर में एक प्राचीन मंदिर था। वहां का पुजारी वंश परंपरा के अनुसार ही होता था। यानी पुजारी का लड़का ही पुजारी बनता था। यही परंपरा थी। मंदिर में जो चढ़ावा आता भेंट स्वरूप जो श्रद्धालु भेंट चढ़ाते उनकी चोरी कर-कर के वह परिवार धीरे-धीरे शहर का एक धनाढ्य परिवार बन गया। उसी शहर में एक चोर था। जो बेहद ही चालाक और शातिर था। यह भी उसके कुल खानदान की परंपरा थी। यह हुनर पीढ़ियों से उसके घर - परिवार में चल रहा था। मानवता और इश्वर पर अटूट विश्वास था। प्रत्येक सुबह मंदिर जरूर जाता। चोरी किए गए धन का कुछ भाग वह मंदिर में चढ़ावे के रूप में चढ़ाता और कुछ गरीबों में बांट देता। शेष भाग से वह अपने घर परिवार का भरण-पोषण करता। एक दिन वह चोर जब पुजारी के घर से चोरी करके जैसे ही बाहर निकल रहा था, उसी समय रात में आवारागर्दी करने वाले कुछ लोगों ने उसे देख लिया और उसे मारने के लिए पीछे दौड़ पड़े। चोर भागते - भागते ...