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My Inception-8 (Milestone)

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Written by: Shailendra S. मेरे प्रिय दोस्तों!   मैं शैलेंद्र एस. सप्रेम नमस्ते! जैसा कि मैंने आप लोगों को पहले भी बताया कि,   "माइलस्टोन लिखना मेरे जीवन का सपना था, और इस सपने के साथ में जीना भी चाहता था। "       या यूं कहूं कि इसे लिखने से पहले मैं मरना भी पसंद नहीं करता।       हम इसी एक जीवन में कई जिंदगी जीते हैं। जिंदगी की राहों में चलते चलते कई मुकाम हासिल करते हैं, कई मंजिलें हासिल करते हैं।       बतौर राइटर, मैं ने अपने आपको आपके सामने स्थापित नहीं करना चाहा। खासकर माइलस्टोन के लिए तो बिल्कुल नहीं। उसकी एक वजह यही रही कि मैं माइलस्टोन के लिए प्रोफेशनल राइटर नहीं बनना चाहता था।           लगभग 2011 से मैंने लिखना छोड़ दिया था। मैंने physics, chemistry mathematics, economics accountancy, computer science पढ़ने और पढ़ाने वाला था। और शायद इसीलिए मैं खुद को लिटरेचर के काबिल नहीं समझ पाया। बावजूद इसके कि मेरी कई कहानियां नेशनल मैगजीन और रेडियो स्टेशन में प्रकाशित एवं प्रसारित हुई थी। किंतु म...

🌷माइलस्टोन🌷 ( कविताएं )💖

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मैं चलती राहों का लेखक। जिंदगी के इस सफर में ये मेरे हमदम ! मेरे दोस्त !! जो मिलो तुम किसी मोड़ पर तो हम बयां करें तुम्हें अपना हाल-ए-दिल।  कैसे जिए हम तुम्हारे बिना। (0) चिर वियोगिनी प्रीत तुम्हारी, प्रेम योगेश्वर क्षणभंगुर काया, कल्प वृक्ष, चिर शांत हृदय, स्थिर मन की विस्तृत छाया। अस्तांचल में अस्त सूर्य से, ले रश्मि किरण बन मृदुल चांदनी, निशा पथिक सुने अंबर में, विचलित अब कुछ शरमाया। तुम अलसाई जब प्रिय बाहों में,  डूब नेत्र-नीर मैं अकुलाया। प्रिय बाहों में अब छोड़ तुम्हें,  विधु संग आगे बढ़ जाता हूं। हां , मैं चलती राहों का लेखक, माइलस्टोन पर लिखता हूं। 🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷 मिले तुम्हे मुक्कमल जहां, मेरे बगैर भी। मिले तुम्हे मुक्कमल खुशी, मेरे बगैर भी।   कभी तुम मुझे खोजना,   अपनी मुकद्दस दुआओं में,   तो कभी मैं खोजता फिरुगा,   तुम्हें यूं ही चलते-चलते,   इन्ही  वीरां रास्तों में।   कभी जज़्ब होंगे जो आंसू, तुम्हारी निगाहों में, तब रोएगा यह आसमा भी, बन सावन की घटाओं में।     जब कभी उठेगी कोई बेचैनी,    ...