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Showing posts from January, 2022

माना कि 💓💓💓

माना इस कदर रुसवा हुए महफिलों में, बज्म-ए-यारां में अश्क-ए-नूर हो गए । ✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️ हां, कुछ तो था हमारी, आशिकी में भी असर, जो छलक कर कहीं तुम,  बस एक जाम न हो गए। 💕💕💕💕💕💕💕 कुछ तो वफा निभाई है तुम ने भी,  ये मेरी जान - ए  - वफा ! जो हम भी पूरे के पूरे, किसी और का न हो गए। 💚💚💚💚💚💚 कुछ तो उधार रह गया था शायद, इस मोहब्बत के बाजार में, चुकाते रहे जिसका कर्ज, जो अब तक रुखसत न हो गए। Shailendra S. 💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝

आप कैसी है 💓

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जब कायनात और रातें सोती हैं,  तो फिर हम जगा करते हैं। जब कुछ लिखने का मन न हो,  फिर छत को देखा करते है। जब बढ़ जाती मन की बेचैनी, अध लिखे पन्नों को फाड़ा करते है। 🌹 जब खुद का गुजारा न हो खुद से, उनको फिर से याद किया करते हैं। शायद देख लिया होगा मेरा स्टेटस, फिर इसका पता लगाया करते हैं। जब कुछ हाल नहीं मिलता उनका, फोन लगाने की भी सोचा करते हैं। जब हद से गुजरने लगती है यादें उनकी, उनको भुला देने की भी सोचा करते हैं। 🌹 भूले न वे जब लाख जतन करने पर भी, झुट्टू-मुट्ठ फिर उन्हे फोन लगाया करते है। हेलो - हेलो, कई बार बोलने पर उनके, तब हम धीरे से हेलो बोला करते है। न जाने वे क्या सोचेगी क्या समझेगी ! यह सोच, हम झट से , " आप कैसी है ",  बस इतना ही तो पूछा करते है। 💖💖💖 Shailendra S. SATNA ✍️

तुम मेरी 5 सेकंड की मुहब्बत

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💢💢💢💢💢💢💢💢 वह एक खूबसूरत सी सुबह, आकाश में बस अभी-अभी, का उगा लाल-लाल सूरज। चहल-पहल, भीड़ भाड़ में, खुद को बचता-बचाता सा मैं। ⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡⚡ जिंदगी की रफ्तार से भागती सड़क, मैं बेपरवाह, बेलगाम, बेजार, बेरोजगार बेवजह बस! चले जा रहा था। अचानक,  हां एकदम अचानक ही  !! जब तुम मेरे सामने आ गई, मुझसे टकराते-टकराते कुछ ही बची। 💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓💓 मेरी भागती और दौड़ती जिंदगी, जब एकदम अचानक ठहर सी गई। वक्त के खजाने से मिले कुछ ही सेकंड, मैं जब सब कुछ भूल सा गया, आवारगी, अपनी बेचारगी, उदासी, हां सबकुछ, शायद खुद को भी। और तुम्हे ! बस तुम्हे देखता रह गया । 💓💓💓💓💚💚💚💚💚💓💓💓💓 वक्त की घड़ी की तरह मेरा दिल💓 धड़का टिक💓 टिक💓 टिक 💓टिक💓 टिक💓💚 अगले ही पल मैं सचेत कुछ सावधान। छठवीं बार !! दिल की धड़कनो को, धड़कने से रोक सा लिया मैंने। डर था लगातार 6 सेकंड देखने पर, कहीं तुम मुझे स्टॉकर न समझ लो। और सातवां सेकंड तो गजब का होता, मैं तुम्हारा दीवाना जो बन गया होता। 💚💚💚💚💚💚💚💚💚💚💚💚💚 मेरी पाक साफ पहली नजर तुम, ये, हां तुम ! कही तुम रुसवा न हो जाती। 💚💓💚?...

My Inception 6 मित्रता मेरा धर्म है।

मित्रता मेरा धर्म है    कुरुक्षेत्र में के मैदान में मैं उस अर्जुन के साथ था जिसके हाथ से गांडीव छूट रहा था। हाथ पाव कांप रहे थे । संबंधों की मोह जाल में फंसे उस अद्वितीय योद्धा के आत्मबल के रूप में मैं उसका सारथी बना। मैं उसके साथ था, क्या इसलिए कि अर्जुन मेरी बुआ कुंती का पुत्र था या फिर मेरी बहन सुभद्रा का पति था ? नहीं, बिल्कुल नहीं!  वह मेरा मित्र था और उस धर्म युद्ध में मैं अपने मित्र के साथ खड़ा था।         पांडवों की संभावित मृत्यु से आशंकित मेरी मां कुंती जब मुझसे यह कहने के लिए मेरे समीप आई कि मैं उसका जेष्ठ पुत्र हूं। और इस नाते पांडव मेरे अनुज हैं । मेरे अनुज मेरे दुश्मन कैसे हो सकते है ? इसलिए मैं उनसे युद्ध न करूं ।   कृष्ण ने भी मुझे मेरे जन्म का रहस्य भी बताया था और उन्होंने मुझे प्रलोभन भी दिया कि मैं जेष्ठ कुंती पुत्र, जेष्ठ पांडव, इस नाते मैं उस सिंहासन का प्रथम उत्तराधिकारी हूं जो इस युद्ध के बाद युधिष्ठिर को मिलने जा रहा था या जिसे मिलने की संभावना थी। आमंत्रित कर सूर्य देव को मैंने मन में, मंत्र शक्ति से तुम्हें जना था प...