अजनबी - 1
अजनबी Shailendra S. (Story of Destiny) "....मानवीय संवेदनाओं से परे यदि कोई दुनियां होती है तो वह दुनियां देवताओं की दुनियां है, और ईश्वर साक्षी है पीहू ! हम देवता नहीं..." कहानी के किरदार ---------------------- वह दौर न तो GEN-Z जनरेशन का था और न ही ALFA का। दौर था 1997 का, जहां मैं इस कहानी के किरदारों से पहली बार मिला। GEN-Z जनरेशन के जन्म की शुरुआत हो चुकी थी और हम ZEN-X के पहले दशक में पैदा हुए युवा अवस्था में थे। उस दौर में मोहब्बत का इजहार बोलकर कम और खत या निगाहों से अधिक किया जाता था। और इकरार ? बस थोड़ा सा मुस्कुराना ही काफी होता था।ज्यादा सवाल-जवाब नहीं होते थे। अपने हृदय की बात को दूसरे हृदय तक पहुंचाने के लिए और उन्हें जोड़ कर रखने के लिए आंखों के इशारों का वाई-फाई ही पर्याप्त होता था। कामयाबी या नाकामयाबी से दूर यदि मोहब्बत की बात की जाए तो जिसे एकबार हो जाए तो वह कायदे का इंसान बन जाता था। खैर मैं तो 18 की उम्र में ही कुछ कायदे का इंसान बन चुका था और सत्य उर्...